मृत्यु-भोज का सांस्कृतिक एवं संरचनात्मक अध्ययन: परंपरा, सामाजिक दबाव और सेवा-आधारित वैकल्पिक मॉडल के परिप्रेक्ष्य में
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भारतीय समाज में मृत्यु को जीवन का स्वाभाविक सत्य माना जाता है। तेरहवीं का संस्कार शोक अवधि की समाप्ति और समाज में पुनः जुड़ने काप्रतीक है। पहले मृत्यु-भोज का उद्देश्य लोगों को एक साथ बैठाकर शोक संतप्त परिवार को सहारा देना और आपसी सहयोग की भावना कोमजबूत करना था। समय के साथ, खासकर शहरी क्षेत्रों में, यह परंपरा कई जगह दिखावे और सामाजिक प्रतिष्ठा से जुड़ गई है। इसके कारणकई परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ जाता है, विशेषकर निम्न आय वर्ग पर।
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Published
2026-08-18
Issue
Section
Research Articles