हैंडहेल्ड कैमरा-तकनीक: डाक्यूमेंट्री स्टोरीटेलिंग में एक सिनेमेटोग्राफ़िक रणनीति

राजमणि मौर्य (असिस्टेंट प्रोफेसर एवं सिनेमेटोग्राफर),  जय प्रकाश (फिल्म निर्देशक एवं टेक्निकल असिस्टेंट), सेंटर फॉर थिएटर एंड फिल्म, इलाहाबाद विश्वविद्यालय, Email: maurya.rajmani9@gmail.com, Contact Number: +918874971493

Abstract

एक बेहतरीन डाक्यूमेंट्री फिल्म बनाने के लिए तमाम तरह की रणनीतियाँ अपनानी पड़ती है। इनमें से एक बड़ी रणनीति सिनेमेटोग्राफी के हवाले से हैंडहेल्ड कैमरा-तकनीक (स्ट्रोएबेल, २०१३)  की होती है। रुपहले पर्दे तक लाने में डॉक्यूमेंट्री के सफ़र में रणनीति की कई परतें एक साथ बुननी पड़ती हैं। जैसे विषय का चुनाव करना; वास्तविकता को रिकॉर्ड कर लेना; किसी को बिना बताए अटूट सत्य एवं तथ्यों को स्टोरीटेलिंग के द्वारा दर्शकों तक पहुँचाना; संपादन की प्रक्रिया द्वारा प्रमाणिक तथ्यों को उभारकर प्रस्तुत करना। डाक्यूमेंट्री स्टोरीटेलिंग के इस महत्वपूर्ण सफ़र में सिनेमेटोग्राफर/कैमरामैन/कैमरावोमेन के द्वारा हैंडहेल्ड कैमरा-तकनीक की सहायता से, वास्तविकता को बड़े पर्दे पर चित्रित करना ही एक सिनेमाटोग्रफिक रणनीति है (मेर्कादो, २०२२)।

इसी क्रम में, यह शोध पत्र गंगापुत्र (२०२१) (निर्देशक: जय प्रकाश; एडिटर: सौमित्रो खांन्रा; २०२१) नामक डाक्यूमेंट्री में हैंडहेल्ड शॉट्स का तरीका/नरेशन/ स्टोरीटेलिंग को टटोलेगी। इस डॉक्यूमेंट्री का चयन, शोध पत्र के लिए मूलतः दो कारणों से किया गया है — पहला, बतौर सिनेमेटोग्राफर राजमणि मौर्य, जो इस शोध पत्र के मुख्य लेखक भी हैं, उन्होंने इसमें अपने रचनात्मक शिल्प को परिलक्षित किया है; दूसरा यह डॉक्यूमेंट्री इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ़ इंडिया (ई.एफ.एफ.आई-२०२१), कोलकाता इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल(के.आई.एफ.एफ-२०२१) एवं अन्य राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में शिरकत कर चुकी है।

यह डॉक्यूमेंट्री, इलाहाबाद कुम्भ मेले में “भूले-भटके” लोगों को मिलाने का सिलसिला शुरू करने वाले शख़्स राजाराम तिवारी की है। मात्र १६ साल की आयु में ही राजाराम जी ने इस कठिन काम का बीड़ा उठाया और निःस्वार्थ भाव से इस कार्य का अपने अंतिम सांस तक निर्वाहन किया। ऐसे शख़्स के जीवन की मर्म वेदना की कहानी को जब हूबहू दिखाने का निर्णय लिया गया, तब डॉक्यूमेंट्री अंदाज ही सबसे उचित माध्यम बना। इसके फल स्वरूप, कुम्भ मेले में लाखों की भीड़ में हैंडहेल्ड कैमरे से शॉट्स लेना आपने आप में ही बहुत चुनौतीपूर्ण काम रहा। यह शोध पत्र, हैंडहेल्ड कैमरा-तकनीक एवं स्टोरीटेलिंग के बीच के तनाव में गहरे संबंध को उजागर करते हुए, डॉक्यूमेंट्री सिनेमेटोग्राफी के विमर्श पर चर्चा करेगी (रबिगर, १९८७)। और चर्चा करते हुए, डॉक्यूमेंट्री स्टोरीटेलिंग की वास्तविकता को दर्शकों तक ले जाने की विद्या पर अपने विचार व्यक्त करेगी।

 मुख्य शब्द: डॉक्यूमेंट्री, सिनेमेटोग्राफी, हैंडहेल्ड कैमरा, शॉट्स, कैमरा तकनीक, स्टोरीटेलिंग।

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हैंडहेल्ड कैमरा-तकनीक: डाक्यूमेंट्री स्टोरीटेलिंग में एक सिनेमेटोग्राफ़िक रणनीति